धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१।२० ] यमकवग्गो [ ९
श्रावस्ती ( जेतवन ) दो मित्र भिक्षु
१६—बहुंपि चे संहितं१ भासमानो ,
न तक्करो होति नरो पमत्तो ।
गोपो 'व गावो गणयं परेसँ ,
न भागवा सामञ्ञस्स होति ॥१६॥
( बह्वीमपि संहितां भाषमाणः,
न तत्करो भवति नरः प्रमत्तः ।
गोप इव गा गणयन् परेषां,
न भागवान् श्रामण्यस्य भवति ॥१९॥
अनुवाद—चाहे कितनी ही संहिताओ (=धर्मग्रंथो ) का उच्चारण करे,
किन्तु प्रमादी बन, (जो) नर उसके (अनुसार )
(आचरण) करनेवाला नहीं होता ; (वह) दूसरेकी
गायोको गिननेवाले ग्वालेकी भाँति श्रमणपन (=संन्यासी-
पन ) का भागी नहीं होता ।
२०—अप्पम्पि चे संहितं भासमानो ,
धम्मस्स होति अनुधम्मचारी ।
रागञ्च दोसञ्च पहाय मोहं ,
सम्मप्पजानो सुविमुत्तचित्तो ।
अनुपादियानो इध वा हुरं वा ,
स भागवा सामञ्ञस्स होति ॥२०॥
१ संहित ।