सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 139

१२८ ] धम्मपदं [ २०।१७
जेतवन किसा गोतमी (थेरी)
२८७-तं पुत्तपसुसम्मतं व्यासत्तममनसं नरं ।
सुत्तं गामं महोधो 'व मच्चू आदाय गच्छति ॥ १५ ॥
(तं पुत्र-पशु-सम्मतं व्यासक्तमनसं नरम् ।
सुप्तं ग्रामं महौघ इव मृत्युरादाय गच्छति ॥१५॥)
अनुवाद—सोये गाँवको जैसे बड़ी बाढ़ (बहा ले जाये), वैसेही पुत्र
और पशुमें लिप्त आसक्त (-चित्त) पुरुषको मौत ले जाती है।
जेतवन पटाचारा (थेरी)
२८८-न सन्ति पुत्ता ताणाय न पिता नापि बन्धवा ।
अन्तकेनाधिपन्नस्स नत्थि ञातिसु ताणता ॥ १६॥
(न सन्ति पुत्रास्त्राणाय न पिता नाऽपि बान्धवाः ।
अन्तकेनाऽधिपन्नस्य नाऽस्ति ज्ञातिषु त्राणता ॥१६॥)
अनुवाद—पुत्र रक्षा नहीं कर सकते, न पिता, न बन्धुलोग ही। जब
मृत्यु पकड़ता है, तो ज्ञातिवाले रक्षक नहीं हो सकते।
२८६-एतमत्थवसं ञत्वा पण्डितो सीलसंवुतो ।
निब्बान-गमनं मग्गं खिप्पमेव विसोधये ॥ १७॥
(एतमर्थवशं ज्ञात्वा पण्डितः शीलसंवृतः ।
निर्वाणगमनं मार्गं क्षिप्रमेव विशोधयेत् ॥१७॥)
अनुवाद—इस बातको जानकर पण्डित (नर) शीलवान् हो, निर्वाण
की ओर लेजानेवाले मार्ग को शीघ्र ही साफ करे ।
=०-*-०=