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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 122

१८।१४ ] मलवग्गो [ १११
( हीमता च दुर्जीवितं नित्यं शुचिगवेषिणा ।
अलीनेनाऽप्रगल्भेन शुद्धाजीवेन पश्यता ॥११॥ )
अनुवाद—( पापाचारके प्रति ) लज्जावान्, नित्य ही पवित्रताका
ख्याल रखने वाले, निरालस, अनुच्छृंखल, शुद्ध जीविका
वाले सचेत ( पुरुष ) के जीवनको कठिनाईंसे बीतते
देखते हैं।
जेतवन पाँच सौ उपासक
२४६-यो पाणमतिपातेति मुसावादञ्च भासति ।
लोके अदिन्नं आदियति परदारञ्च गच्छति ॥१२॥
( यः प्राणमतिपातयति मृषावादं च भाषते ।
लोकेऽदत्तं आदत्ते परदारांश्च गच्छति ॥१२॥ )
२४७-सुरामेरयपानञ्च यो नरो अनुयुञ्जति ।
इधेवमेसो लोकस्मिं मूलं खनति अत्तनो ॥१३॥
( सुरामैरेयपानं च यो नरोऽनुयुनक्ति ।
इहैवमेष लोके मूलं खनत्यात्मनः ॥१३॥ )
२४८-एवं भो पुरिस । जानाहि पापधम्मा असञ्ञता ।
मा तं लोभो अधम्मो च चिरं दुक्खाय रन्धयुं ॥१४॥
( एवं भो पुरुष ! जानीहि पापधर्माणोऽसंयतान् ।
मा त्वां लोभोऽधर्मश्च चिरं दुःखाय रन्धेरन् ॥१४॥ )
अनुवाद—जो हिंसा करता है, झूठ बोलता है, लोकमें चोरी करता
है (=बिना दियेको लेता है), परस्त्रीगमन करता है।