धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
पृष्ठ 118, कुल 213 में से
संदर्भ में पढ़ें१८-मलवग्गो
जेतवन गोघातक-पुत्र
२३५-पाण्डुपलासो'वदानिसि, यमपुरिसापि च तं उपट्ठिता।
उय्योगमुखे च तिट्ठसि पाथेय्यम्पि च ते न विज्जति ॥१॥
(पाण्डुपलासमिवेदानीमसि यमपुरुषाअपि चत्वां उपस्थिताः।
उद्योगमुखे च तिष्ठसि पाथेयमपि च ते न विद्यते ॥१॥)
२३६-सो करोहि दीपमत्तनो खिप्पं वायम पण्डितो भव ।
निद्धन्तमलो अनङ्गणो दिब्बं अरियभूमिमेहिसि ॥२॥
(स कुरु द्वीपमात्मनः क्षिप्रं व्यायच्छस्व पण्डितो भव ।
निर्धूतमलोऽनंगणो दिव्यां आर्यभूमिं एष्यसि ॥२॥)
अनुवाद-पीले पत्तेके समान इस वक्त तू है, यमदूत तेरे पास आ
खडे हैं, तू प्रयाणके लिये तय्यार है, और पाथेय तेरे पास
कुछ नहीं है। सो तू अपने लिये द्वीप ( = रक्षास्थान )
बना, उद्योग कर, पंडित बन, मल प्रक्षालित कर, दोष-
रहित बन आर्योंके दिव्य पदको पायेगा।