धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
DevanagariHindipublished213 पृष्ठ
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१०६ ] धम्मपदं [ १७।१४
२३३-मनोप्पकोपं रक्खेय्य मनसा संवुतो सिया ।
मनोदुच्चरितं हित्वा मनसा सुचरितं चरे ॥१३॥
(मनः प्रकोपं रक्षेत् मनसा संवृतः स्यात् ।
मनोदुश्चरितं हित्वा मनसा सुचरितं चरेत् ॥१३॥ )
२३४-कायेन संवृता धीरा अथो वाचाय संवृता ।
मनसा संवृता धीरा ते वे सुपरिसंवुता ॥१४॥
( कायेन संवृता धीरा अथ वाचा संवृताः ।
मनसा संवृता धीराः ते वै सुपरिसंवृता ॥१४॥ )
अनुवाद—कायाकी चञ्चलतासे रक्षा करे, कायासे संयत रहे, कायिक
दुश्चरितको छोड़ कायिक सुचरितका आचरण करे । वाणी
की चंचलतासे रक्षा करे, वाणीसे संयत रहे, वाचिक
दुश्चरितको छोड, वाचिक सुचरितका आचरण करे । मनकी
चंचलतासे रक्षा करे, मनसे सयत रहे, मानसिक दुश्चरितको
छोड, मानसिक सुचरितका आचरण करे ।
१७-क्रोधवर्ग समाप्त