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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 114

१७६ ] कोधवग्गो [ १०३
अनुवाद—सच बोले, क्रोध न करे, थोडा भी माँगनेपर दे, इन तीन
बातोसे ( पुरुष ) देवताओके पास जाता है ।
साकेत (=अयोध्या ) ब्राह्मण
२२५-अहिंसका ये मुनयो निच्चं कायेन संवुता ।
ते यन्ति अच्चुतं ठानं यत्थ गन्त्वा न सोचरे ॥५॥
( अहिंसका ये मुनयो नित्यं कायेन संवृताः ।
ते यन्ति अच्युतं स्थानं यत्र गत्वा न शोचन्ति ॥५॥ )
अनुवाद—जो मुनि ( लोग ) अहिंसक, सदा कायामें संयम करनेवाले
हैं, वह ( उस ) अच्युत स्थान (=जिस स्थान पर पहुँच
फिर गिरना नहीं होता )को प्राप्त होते हैं, जहाँ जाकर
फिर नहीं शोक किया जाता ।
राजगृह ( गृध्रकूट ) राजगृह-श्रेष्ठीका पुत्र
२२६-सदा जागरमानानं अहोरत्तानुसिक्खिनं ।
निब्बाणं अधिमुत्तानं अत्थं गच्छन्ति आसवा ॥६॥
( सदा जाग्रतां अहोरात्रं अनुशिक्षमाणानाम् ।
निर्वाणं अधिमुक्तानां अस्तं गच्छन्ति आस्रवाः ॥६॥ )
अनुवाद—जो सदा जागता (=सचेत ) रहता है, रातदिन ( उत्तम )
सीख सीखनेवाला होता है, और निर्वाण ( प्राप्त कर )
मुक्त हो गया है, उसके आस्रव (=चित्त मल ) अस्त हो
जाते हैं ।