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सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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१७—कोधवग्गो
कपिलवस्तु ( न्यग्रोधाराम ) रोहिणी
२२१-कोधं जहे विप्पजहेय्य मानं
संयोजनं सब्बमतिकम्मेय्य ।
तं नाम-रूपस्मिं असज्जमानं
अकिञ्चनं नानुपतन्ति दुक्खा ॥ १॥
(क्रोधं जह्याद् विप्रजह्यात् मानं
संयोजनं सर्वमतिक्रामेत् ।
तं नाम-रूपयोरसज्यमानं
अकिंचनं नाऽनुपतन्ति दुःखानि ॥१॥)
अनुवाद—क्रोधको छोड़े, अभिमानका त्याग करे, सारे संयोजनों
(=बंधनों) से पार हो जाये, ऐसे नाम-रूपमें आसक्त न
होनेवाले, तथा परिग्रहरहित (पुरुष)को दुःख संताप
नहीं देते।