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सर्वकोश
दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary

जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished46 पृष्ठ

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दो शब्द
CC-0. Agamnigam Digital Preservation Foundation, Chandigarh
श्री १०८ श्री श्रीवर शास्त्रि गुरु चरण कमले भ्यो नमः
बाचक वृन्द
याज्ञ वल्क्य स्मृति के दाय भाग का भारतवर्ष के अधिकांश
भाग में सम्मान है, भारतीय सांविधान इसी स्मृति की मिताक्षरा
टीका का अवलम्बन लेकर कतिपय गम्भीर विवादों का समाधान
करता है, आंग्ल शासकों ने भारतीय विवाह—दतकाधिकार आदि के
'कानून, बहुधा इसी के आधार पर बनाये थे।
दाय भाग में यद्यपि श्लोक संख्या ३४ है तथापि मिताक्षरा
कार का अभिप्राय लग-भग ४० पृष्ठों में पूर्ण हुआ है। मिताक्षरा की
भाषा प्रौढ़ एवं धर्म शास्त्रों के गहन मर्मों से परिपूर्ण है। धर्म शास्त्रा
चार्य परीक्षा में प्रविष्ट होते समय मेरा ध्यान इस ओर गया, परन्तु
उस समय यह कार्य पूर्ण न हुआ, गत वर्ष एम० ए० प्रथम वर्ष ( सं०
के छात्रों ने जब धर्म शास्त्र का प्रश्न पत्र लिया तब उनकी कठिनाई
का ध्यान रखकर इसकी हिन्दी टीका करने का विचार किया, यह
उसी विचार का पल्लवित रूप है।
यद्यपि यह हिन्दी टीका कई मास पूर्व लिखी जा चुकी थी
तथापि मुद्रण सम्बन्धी अव्यवस्था ने इसे अभी तक रोके रखा।
अकस्मात् श्री स्वामी जी महाराज ने इसे छात्रों की सुविधा
का ध्यान रखते हुए प्रोत्साहित किया यह उन्हीं की कृपा का फल है जो
इतनी शीघ्र प्रकाशित हो रही है।
इस साहाय्य के लिये मैं स्वामी जी से किन शब्दों में कृतज्ञता
प्रकट करूं नहीं जानता।