दत्तकमीमांसा (नन्दपण्डित - हिन्दू दत्तक-ग्रहण विधि एवं न्याय का आधारभूत ग्रन्थ)
Dattaka Mimansa of Nanda Pandita on Hindu Adoption Law
नन्दपण्डित (अनुवादक: जे. सी. सी. सदरलैण्ड) द्वारा
पृष्ठ 149, कुल 191 में से
संदर्भ में पढ़ें" or "आवालंगस्त्य".
Wait, let's check line 3:
"चौरसे पुनरुत्पन्ने तेषु ज्येष्ठं न"
Wait, why "चौरसे"?
Because "च + औरसे = चौरसे"!
"औरसे पुनरुत्पन्ने" from Devala, preceded by "च": "चौरसे पुनरुत्पन्ने तेषु ज्येष्ठं न विद्यते".
That's why it is "चौरसे"! That is completely normal Sanskrit sandhi: च + औरसे = चौरसे!
And in line 8:
"प्रत्यब्दमितरे कुर्य्युरेकोद्दिष्टं सुता दश।"
Let's check the word:
क-ु-र-्-य-्-य-ु-र-े-क-ो-द-्-द-ि-ष-्-ट-ं
It is: कुर्य्युरेकोद्दिष्टं! (with double ya: कु + र् + य् + यु + रे + को...)
Wait, is there a repha on the first ya, or above?
Yes, it's कुर्य्युरेकोद्दिष्टं (traditional orthography often doubles consonants after repha: कुर्य्युः -> कुर्य्युरेकोद्दिष्टं).
Let's check line 10:
"सस्य त्रिपौरुषम् सर्व्वत्रानेकगोत्राणामेकोद्दिष्टं क्षयेऽहनीति।"
Wait, look at "