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सर्वकोश
दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Dasarupaka of Dhananjaya with Avaloka Commentary

आचार्य धनञ्जय (टीकाकार: धनिक / डॉ. भोलाशंकर व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished168 पृष्ठ

पृष्ठ 100, कुल 168 में से

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पृ० २९)—'हा आर्ये ताडके, किं हि नामैतत् । अम्बुनिLine 26:मज्जन्त्यलाबूनि, ग्रावाणः प्लवन्ते ।Line 27:'नन्वेष राक्षसपतेः स्खलितः प्रतापः प्राप्तोऽद्भुतः परिभवो हि मनुष्यपोतात् ।Line 28:दृष्टः स्थितेन च मया स्वजनप्रमाथो दैन्यं जरा च निरुणद्धि कथं करोमि ॥'Line 29:( वीर० १।४० )Line 30:अथौत्सुक्यम्—Line 31:कालाक्षमत्वमौत्सुक्यं रम्येच्छारतिसंभ्रमैः ।Line 32:तत्रोच्छ्वासत्वैनिःश्वासहृत्तापस्वेदविभ्रमाः ॥ ३२ ॥Line 33:यथा कुमारसंभवे ( ७।२२ )—Line 34:'आत्मानमालोक्य च शोभमानमादर्शबिम्बे स्तिमितायताक्षी ।Line 35:हरोपयाने