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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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सुमिरन का अङ्ग
दरिया सुमिरै राम को, सहज तिमिर का नास।
घट भीतर होय चाँदना, परम जोति परकास ॥२२॥
सतगुर संग न संचरा, राम नाम उर नाहिं।
ते घट मरघट सारिखा, भूत बसै ता माहिं ॥२३॥
राम नाम ध्याया नहीं, हुआ बहुत अकाज।
दरिया काया नगर में, पंच भूत का राज ॥२४॥
पंच भूत के राज में, सब जग लागा धुंध।
जन दरिया सतगुर बिना, मिल रहा अंधा अंध ॥२५॥
सब जग अंधा राम बिन, सूझि न काज अकाज।
राव रंक अंधा सबै, अंधों ही का राज ॥२६॥
दरिया सब जग आँधरा, सूझै सो बेकाम।
सूझा तबही जानिये, ता को दरसै राम ॥२७॥
मन बच काया समेट कर, सुमिरै आतम राम।
दरिया नेड़ा नीपजै१, जाय बसै निज धाम ॥२८॥
सकल ग्रंथ का अर्थ है, सकल बात की बात।
दरिया सुमिरन राम का, कर लीजै दिन रात ॥२६॥
ध्रू लोक ध्रू राम कह, कहै पताला सेस।
दरिया परघट नाम बिन, कहु कौन आयो देख ॥३०॥
लोह पलट कंचन भया, कर पारस को संग।
दरिया परसै नाम को, सहजहिं पलटै अंग ॥३१॥
अपने अपने इष्ट में, राच रहा सब कोय।
दरिया रत्ता राम सूं, साधसिरोमन सोय ॥३२॥
दरिया धन वे साधवा, रहें राम लौ लाय।
राम नाम बिन जीव सो, काल निरंतर खाय ॥३३॥
(१) पैदा हो।