दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजैसे सतगुर तुम करी, मुझ से कछू न होय ।
बिष भाँड़े बिष काढ़ कर, दिया अमीरस मोय ॥२३॥
गुरु आये घन गरज कर, अंतर कृपा उपाय ।
तपता से सीतल किया, सोता लिया जगाय ॥२४॥
गुरु आये घन गरज कर, सब्द किया परकास ।
बीज पड़ा था भूमि में, भई फूल फल आस ॥२५॥
गुरु आये घन गरज कर, करम कड़ी सब खेर१ ।
भरम बीज सब भूनिया, ऊग न सक्के फेर ॥२६॥
साध सुधारै सिष्य को, दे दे अपना अंग ।
दरिया संगत कीट की, पलटि सो भया भिरंग ॥२७॥
यह दरिया की बीनती, तुम सेती महराज ।
तुम भृंगी मैं कीट हूँ, मेरी तुमको लाज ॥२८॥
बिख छुड़ावैं चाह कर, अमृत देवैं हाथ ।
जन दरिया नित कीजिये, उन संतन को साथ ॥२९॥
उन संतन के साथ से, जिवड़ा पावै जख२ ।
दरिया ऐसे साध के, चित चरनों ही रख ॥३०॥
बाड़ी में है नागरी३, पान देसांतर जाय ।
जो वहँ सूखै बेलड़ी, तौ पान वहाँ बिनसाय ॥३१॥
पान बेल से बीछुड़ै, परदेसाँ रस देत ।
जन दरिया हरिया रहै, उस हरी बेल के हेत ॥३२॥
कुंभी४ परदेसों फिरै, अंड धरै घर माहिं ।
निस दिन राखै हेत में, ता सों बिनसै नाहिं ॥३३॥
अलल५ अंड को डाल दे, अंतर राखै हेत ।
पाक६ फूट पर पक होवै, (जब) खैंच आप दिस लेत ॥३४॥
(१) मिटाकर । (२) चैन । (३) नागर वेल । (४) एक चिड़िया का नाम (कुंज) ।
(५) एक चिड़िया का नाम (अलल पच्छ) । (६) पक कर ।