दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदरिया साहब मारवाड़
दरिया मिरतक देख कर, सतगुर कीनी रीझ।
नाम सजीवन मोहिं दिया, तीन लोक को बीज ॥११॥
तीन लोक को बीज है, ररो ममो दोइ अंक।
दरिया तन मन अर्प के, पीछे होय निसंक ॥१२॥
जन दरिया गुरदेव जी, सब बिधि दई बताय।
जो चाहो निज धाम को, सो साँस उसाँसो ध्याय ॥१३॥
जन दरिया सतगुर मिला, कोई पुरबले पुन्न।
जडु पलट चेतन किया, आन मिलाया सुन्न ॥१४॥
दरिया सतगुर सब्द सौं, गत मत पलटै अंग।
कर्म काल मन का मिटा, हरि भज भये सुरंग ॥१५॥
नहिं था राम रहीम का, मैं मतहीन अजान।
दरिया सुध बुध ज्ञान दे, सतगुर किया सुजान ॥१६॥
सोता था बहु जन्म का, सतगुर दिया जगाय।
जन दरिया गुरु सब्द सौं, सब दुख गये बिलाय ॥१७॥
सतगुर सब्दाँ मिट गया, दरिया संसय सोग।
औषद दे हरि नाम का, तन मन किया निरोग ॥१८॥
दरिया सतगुर कृपा करि, सब्द लगाया एक।
लागतही चेतन भया, नेत्तर खुला अनेक ॥१६॥
दरिया गुरु पूरा मिला, नाम दिखाया नूर।
निसा¹ भई सुख उपजा, किया निसाना दूर ॥२०॥
रंजी² सास्तर ज्ञान की, अंग रही लिपटाय।
सतगुर एकहि सब्द से, दीन्ही तुरत उड़ाय ॥२१॥
सब्द गहा सुख उपजा, गया अंदेसा मोहि।
सतगुर ने किरपा करी, खिड़की दीनी खोहि³ ॥२२॥
(१) तसल्ली। (२) रज। (३) खोल।