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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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दरिया साहब (मारवाड़)
की बानी
सतगुर का अंग
नमो राम परब्रह्म जी, सतगुर संत अधारि ।
जन दरिया बंदन करै, पल पल वारूं वारि ॥१॥
नमो नमो हरि गुरु नमो, नमो नमो सब संत ।
जन दरिया बंदन करै, नमो नमो भगवंत ॥२॥
दरिया सतगुर भेंटिया, जा दिन जन्म सनाथ ।
स्रवनाँ सब्द सुनाय के, मस्तक दीना हाथ ॥३॥
सतगुर दाता मुक्ति का, दरिया प्रेम दयाल ।
किरपा कर चरनों लिया, मेटा सकल जँजाल ॥४॥
अंतर थो बहु जन्म को, सतगुर भाँज्यो¹ आय ।
दरिया पति से रूठनो, अब कर प्रीति बनाय ॥५॥
जन दरिया हरि भक्ति की, गुराँ बताई बाट ।
भूला ऊजड़ जाय था, नरक पड़न के घाट ॥६॥
दरिया सतगुर सब्द सौं, मिट गई खैंचा तान ।
भरम अंधेरा मिट गया, परसा पद निरबान ॥७॥
दरिया सतगुर सब्द की, लागी चोट सुठौर ।
चंचल सों निस्चल भया, मिट गइ मन की दौड़ ॥८॥
डूबत रहा भव सिंध में, लोभ मोह की धार ।
दरिया गुरु तैरु मिला, कर दिया पैले पार² ॥९॥
दरिया गुरु गरुवा मिला, कर्म किया सब रद्द ।
झूठा भर्म छुड़ाय कर, पकड़ाया सत सब्द ॥१०॥
(१) मिटा दिया। (२) पल्ले पार।