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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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दरिया साहब मारवाड़
जहँ अधर डाली हंसा बैठा, चुगत मुक्ता हीर ।
आनंद चकवा केल करत है, मानसरोवर तीर ॥३॥
सब्द धुन भिर्दंग बाजै, बारह मास बसंत ।
अनहद ध्यान अखंड आतुर, धरत सबही संत ॥४॥
कान्ह गोपी नृत्य करते, चरन बपु१ हि बिना ।
नैन बिन दरियाव देखै, अनंद रूप घना ॥५॥
॥ राग भैरौ ॥
कहा कहूँ मेरे पिउ की बात,
जो रे कहूँ सोइ अंग सुहात ॥टेक॥
जब मैं रही थी कन्या क्वारी,
तब मेरे करम हता सिर भारी ॥१॥
जब मेरी पिउ से मनसा दौड़ी,
सतगुरु आन सगाई जोड़ी ॥२॥
तब मैं पिउ का मंगल गाया,
जब मेरा स्वामी व्याहन आया ॥३॥
हथलेवा दे बैठो सगा,
तब मोहिं लीनी बाँये अंगा ॥४॥
जन दरिया कहै मिटगइ दूती,
आपो अरप पीव सँग सूती ॥५॥


ऐसे साधू करम दहै ।
अपना राम कबहुँ नहिं बिसरै,
बुरी भली सब सीस सहै ॥टे
हस्ती चलै भँसै बहु कूकर, ता का औगुन उर न ग
वा की कबहुँ न मन नहिं आने, निराकार की ओट र
(१) शरीर ।