दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished52 पृष्ठ
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मिश्रित अंग ४५
कूंड़ा माहीं सूर समाना, चंद्र उलट गया राहू ।
राहु उलट कर तार समाना, भोम१ में गगन समाऊ ॥२॥
त्रिन के भीतर अगिन समानी, राव रंक बस बोलै ।
उलट कपाल तिल माहिं समाना, नाज तराजू तोलै ॥३॥
सतगुर मिलैं तो अर्थ बतावैं, जीव ब्रह्म का मेला ।
जन दरिया वा पद कूं परसै, सो है गुर मैं चेला ॥४॥
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- अब मेरे सतगुर करी सहाई ।
भरम भरम बहु अवधि गँवाई,
मैं आपहि में थित पाई ॥टेक॥
हिरनी जाय सिंघ घर रोका, डरप सिंघनी हारी ।
सोता साह होय कर निर्भय, बस्तु करै रखवारी ॥२॥
अजगर उड़ा सिखर को डाँका, गरुड़ थकित होय बैठा ।
भोम१ उलट कर चढ़ी अकासा, गगन भोम१ में पैठा ॥३॥
सिंघ भया जाय स्याल अधीना, मच्छा चढ़ै अकासा ।
कुरम जाय अगना में सोता, देखै खलक तमासा ॥४॥
राजा रंक महल में पौढ़ा, रानी तहाँ सिधारी ।
जन दरिया वा पद को परसै, ता जन की बलिहारी ॥५॥
॥ राग किदारा ॥
मुरली कौन बजावै हो, गगन मँडल के बीच ॥टेक॥
त्रिकुटी संगम होय कर, गंग जमुन के घाट ।
या मुरली के सब्द से, सहज रचा बैराट ॥१॥
गंग जमुन बिच मुरली बाजै, उत्तर दिस धुन होय ।
उन मुरली की टेरहि सुनि सुनि, रहीं गोपिका मोहि ॥२॥
(१) भूमि, जमीन ।