दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 47, कुल 52 में से
संदर्भ में पढ़ें४४ दरिया साहब मारवाड़
थे ब्रह्म भाव में आतम कन्या, समझ न जानूं बानी ।
दरिया कहै पति पूरा पाया, यह निश्चय कर जानी ॥४॥
साधो मेरे सतगुर भेद बताया ।
ता से राम निकट ही पाया ॥टेक॥
मथुरा कृस्न औतार लिया है, घुरै निसाना धाई ।
ब्रह्मादिक सिव और सनकादिक, सब मिल करत बधाई ॥२॥ -
गगन मँडल में रास रचा है, सहस गोपि इक कंथा ।
सब्द अनाहद राग छतीसों, बाजा बजै अनंता ॥३॥
अकास दिसा इक हस्ती उलटा, राई मान दरवाजा ।
ता में होय गगन में आया, सुनै निरंतर बाजा ॥४॥
सर्प एक बासक उनिहारे, बिष तज अमृत पावै ।
कृस्न चरन में लोटै दीन होय, अमर जुगन जुग जीवै ॥५॥
जहँ इड़ा पिंगला राग उचारैं, चंदर सूर थकाना ।
बहती नदिया थिर होय बैठी, कलजुग किया पयाना ॥६॥
राधा हरि सतभामा सुंदर, मिली कृस्न गल लागी ।
अरस परस होय खेलन लागी, जब जाय दुविधा भागी ॥७॥
आइ प्रतीत और भया भरोसा, भीतर आतम जागी ।
दरिया इकरँग राम नाम भज, सहज भया वैरागी ॥८॥
॥ राग गौरी ॥
साधो एक अचंभा दीठा ।
कडुवा नीम कहै सब कोई, पीवै जा को मीठा ॥टेक॥
चंद के माहीं समुँद समाना, राई में परबत डोलै ।
चूँटी के माहीं हस्ती बैठा, घट में अघटा बोलै ॥१॥