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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 45

४२ दरिया साहब मारवाड़
मीन जाय कर समुंद समानी, जहाँ देखै तहँ पानी ।
काल कीर का जाल न पहुँचे, निर्भय ठौर लुभानी ॥३॥
बावन चंदन भौंरा पहुॅचा, जहं बैठे तहँ गंधा ।
उड़ना छोड़ के थिर हो बैठा, निस दिन करत अनंदा ॥४॥
जन दरिया इक राम भजन कर, भरम बासना खोई ।
पारस परस भया लोह कंचन, बहुर न लोहा होई ॥५॥


साधो राम अनूपम बानी ।
पूरा मिला तो वह पद पाया, मिट गइ खैंचा तानी ॥टेक॥
मूल चाँप दृढ़ आसन बैठा, ध्यान धनी से लाया ।
उलटा नाद कँवल के मारग, गगना माहिं समाया ॥१॥
गुरु के सब्द की कूंजी सेती, अनंत कोठरी खोली ।
ध्रू लोक पर कलस विराजै, ररंकार धुन बोली ॥२॥
जहँ बसत अगाध अगम सुख सागर, देख सुरत बौराई ।
वस्तु घनी पर बरतन ओछा, उलट अपूठी आई ॥३॥
सुरत सब्द मिल परचा हूआ, मेरु मद्ध का पाया ।
ता में पैस गगन में आया, वहँ जाय अलख लखाया ॥४॥
जहँ पग बिन पातर कर बिन बाजा, बिन मुख गावैं नारी ।
बिन बादल जहँ मेंह बरसै है, ठुमक ठुमक सुख क्यारी ॥५॥
जन दरियाव प्रेम गुन गाया, वहँ मेरा अरट चलाया ।
मेरु डंड होय नाल चली है, गगन बाग जहँ पाया ॥६॥


साधो ऐसी खेती करई, जासे काल अकाल न मरई ॥टेक॥
रसना का हल बैल मन पवना, विरह भोम तहँ बाई ।
राम नाम का बीजा बोया, मेरे सतगुर कला सिखाई ॥१॥