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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 44

मिश्रित अंग ४१
मैं तोहि कैसे बिसरूँ देवा ।
ब्रह्मा बिस्नु महेसुर ईसा, ते भी बंधैं सेवा ॥ टेक ॥
सेस सहज मुख निस दिन ध्यावै, आतम ब्रह्म न पावै ।
चाँद सूर तेरी आरति गावैं, हिरदय भक्ति न आवै ॥१॥
अनंत जीव जा की करत भावना, भरमत बिकल आयाना ।
गुरु परताप अखँड लौ लागी, सो तेहि माहिं समाना ॥२॥
बैकुंठ आदि सो अँग माया का, नरक अंत अँग माया ।
पारब्रह्म सो तो अगम अगोचर, कोइ बिरला अलख लखाया ॥३॥
जन दरिया यह अकथ कथा है, अकथ कहा क्या जाई ।
पंछी का खोज मीन का मारग, घट घट रहा समाई ॥४॥


जीव बटाऊ रे बहता भाई मारग माईं ।
आठ पहर का चालना, घड़ी-इक ठहरै नाईं ॥१॥
गरभ जन्म बालक भयो रे, तरुनाये गर्भान ।
बृद्ध मृतक फिर गर्भ बसेरा, [तेरा] यह मारग परमान ॥२॥
पाप पुन्न सुख दुख की करनी, बेड़ी थारे लागी पाँय ।
पंच ठगों के बस पड़्यो रे, कब घर पहुँचै जाय ॥३॥
चौरासी बासो बस्यो रे, अपना कर कर जान ।
निस्चय निस्चल होयगो रे, पद पहुँचै निर्बान ॥४॥
राम बिना तो को ठौर नहीं रे, जहँ जावै तहँ काल ।
जन दरिया मन उलट जगत सूं, अपना राम सम्हाल ॥५॥
॥ राग सोरठ ॥
है कोइ संत राम अनुरागी,
जा की सुरत साहब से लागी ॥ टेक ॥
अरस परस पिव के सँग राती, होय रही पतिबरता ।
दुनिया भाव कछु नहिं समझै, ज्यों समुँद समानी सरिता ॥१॥
६