दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमिश्रित अंग ३६
माया बागड़१ बरनी येह ।
अब राम सिंध बरनूँ सुन लेह ॥ ५ ॥
अगम अगोचर कथ्या न जाय ।
अब अनुभव माहीं कहूँ सुनाय ॥ ६ ॥
अगम पंथ है राम नाम ।
गिरह बसौ जाय परम धाम ॥ ७ ॥
मान सरोवर बिमल नीर ।
जहँ हंस समागम तीर तीर ॥ ८ ॥
जहँ मुक्ताहल बहु खान पान ।
जहँ अवगत तीरथ नित सनान ॥ ९ ॥
पाप पुन्न की नहीं छोत ।
जहँ गुरु सिष मेला सहज होत ॥ १० ॥
गुन इंद्री मन रहे थाक ।
जहँ पहुँच न सके बेद बाक ॥ ११ ॥
अगम देस जहँ अभयराय ।
जन दरिया सुरत अकेली जाय ॥ १२ ॥
चल सूवा तेरे आद राज ।
पिंजरा में बैठा कौन काज ॥ टेक ॥
बिल्ली का दुख दहै जोर, मारे पिंजरा तोर तोर ॥१॥
मरने पहले मरो धीर, जो पाछे मुक्ता सहज खीर ॥२॥
सतगुर सब्द हृदे में धार, सहजाँ सहजाँ करो उचार ॥३॥
अमि प्रवाह धसै जब आभ, नाद प्रकासै परम लाभ ॥४॥
फेर गिरह बसावो गगन जाय, जहँ बिल्ली मृत्यु न पहुँचे आय ॥५॥
आम फलै जहँ रस अनंत, जहँ सुख में पावौ परम तंत ॥६॥
(१) सूखी धरती ।