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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 37

३४ दरिया साहब मारवाड़
जन दरिया अँग साध का, सीतल बचन सरीर ।
निर्मल दसा कमोदिनी, मिले मिटावै पीर ॥५५॥
संकट पड़ै जब साध को, सब संतन के सोग ।
दरिया सहाय करैं हरी, परचे मानैं लोग ॥५६॥
बातों में ही बह गया, निकस गया दिन रात ।
मुहलत अब पूरी भई, आन पड़ी जम घात ॥५७॥
दरिया औषध राम रस, पीये होत समाध ।
महा रोग जीवन मरन, तेहि की लगै न ब्याध ॥५८॥
दरिया निरगुन राम है, सरगुन सतगुर देव ।
यह सुमिरावैं राम को, वो है अलष अभेव ॥५९॥
जारी गावै कृसन की, हड्डी जरावै सीत ।
दरिया कैसे जानिहै, राम नाम की रीत ॥६०॥
दरिया अमल¹ है आसुरी, पिये होय सैतान ।
राम रसायन जो पिये, सदा छाक² गलतान ॥६१॥
नारी आवै प्रीत कर, सतगुर परसै आन ।
दरिया हित उपदेस दे, माय बहिन धी जान ॥६२॥
नारी जननी जगत की, पाल पोस दे पोष ।
मूरख राम बिसार कर, ताहि लगावै दोष ॥६३॥
ररो तौ रब आप है, ममा मोहम्मद जान ।
दोय हरफ में माइना³, सबही वेद पुरान ॥६४॥
ररंकार अनहद की, दरिया परख अवाज ।
और इष्ट पहुँचै नहीं, जहाँ राम का राज ॥६५॥
सिव ब्रह्मा और बिस्नु का, येही उरे मँडान ।
जन दरिया इनके परे, निरंजन का नीसान ॥६६॥
(१) नशा । (२) मस्त । (३) अर्थ ।