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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 38

मिश्रित अङ्ग ३५
दरिया देही गुरमुखी, अबिनासी की हाट ।
सनमुख होय सौदा करै, सहजहि खुलै कपाट ॥६७॥
अरँड आक अरु बाँस तरु, होता चंदन संग ।
गाँठ गँठीला थोथरा, पलटा नाहीं अंग ॥६८॥
उभय करम बंधन करै, नाम करै भय हान ।
दरिया ऐसे दास के, बरतै खैंचा तान ॥६६॥
दरिया दुखिया जब लगी, पछा पछी बेकाम ।
सुखिया जबही होयगा, राज निकंटा राम ॥७०॥
दृष्ट न मुष्ट न अगम है, अति ही करड़ा काम ।
दरिया पूरन ब्रह्म में, कोइ संत करै बिसराम ॥७१॥
॥ राग भैरौ ॥
आदि अनादी मेरा साँईं ॥ टेक ॥
दृष्ट न मुष्ट है अगम अगोचर, यह सब माया उनहीं माईं ॥१॥
जो बन माली सींचै मूल, सहजै पिवै डाल फल फूल ॥२॥
जो नरपति को गिरह बुलावै, सेना सकल महज ही आवै ॥३॥
जो कोई कर भान प्रकासै, तौ निस तारा सहजहि नासै ॥४॥
गरुड़ पंख जो घर में लावै, सर्प जाति रहने नहिं पावै ॥५॥
दरिया सुमिरै एकहि राम, एक राम सारै सब काम ॥६॥
जो सुमिरूँ तो पूरन राम ॥ टेक ॥
अगम अपार दार नहिं जा को, है सब संतन का बिसराम ॥१॥
कोट बिस्नु जा के अगवानी, संख चक्र सत सारँग पानी ॥२॥
कोट कारकुन बिध कर्मधार, परजापति मुनि बहु बिस्तार ॥३॥
कोट काल संकर कोतवाल, भैरव दुर्गा धरम बिचार ॥४॥
अनंत संत ठाढ़े दरबार, आठ सिधि नौ निधि द्वारपाल ॥५॥