दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 35, कुल 52 में से
संदर्भ में पढ़ेंवाहर!
Wait, look at 'वादसाह' (L21): no diagonal line, 'व'!
Look at 'बाहर' in L24: it's 'वाहर'!! 'व' with 'ा' = 'वा'!
Look at 'वाहर भीतर एक': yes, "वाहर भीतर एक" (Dingal/Braj often writes 'वाहर').
Everything is thoroughly verified.३२ दरिया साहब मारवाड़
पाप पुन्न सुख दुःख की, अरट¹ भरत है साख ।
जन दरिया रह राम लग, वहै सबही को राख² ॥३१॥
जीव बिलंब्या³ जीव से, कारज सरै न कोय ।
जन दरिया सतगुर मिलै, तो ब्रह्म बिलंबन⁴ होय ॥३२॥
जीव बिलंबन झूठ है, मिल मिल बिछुड़ै जाय ।
ब्रह्म बिलंबन साँच है, रह उर माँहि समाय ॥३३॥
सकल आदि सब के परे, है अबिनासी राम ।
उपजै बरतै बिनसजै⁵, माया रूपी काम ॥३४॥
दरिया दस दरवाज में, ता बिच पढ़त निमाज ।
ररो ममो इक रटत है, और सकल बेकाज ॥