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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 34

मिश्रित अंग ३१-
तीन लोक चौदह भवन, दरिया देखा जोय ।
राम सरीखा राम है, इसा न दूजा कोय ॥१९॥
तीन लोक चौदह भवन, ढूँढ़ा सबही धाम ।
दरिया देखा निरत कर, राम सरीखा राम ॥२०॥
दरिया परछे१ नाम के, दूजा दिया न जाय ।
तन मन आतम वार कर, राखीजै उर माँय ॥२१॥
दरिया सुमरै राम को, [जाकी] पारख कीजै जाय ।
सरवन ढल नेतर ढलै, देह रसना ढल जाय ॥२२॥
दरिया सतगुरु सब्द ले, करै राम संयोग ।
ज्ञान खुलै अरबल२ बढ़े, देही - रहै निरोग ॥२३॥
दरिया प्रेमी आतमा, करै राम का गाढ़ ।
आवै उबासी चौगुनी, भाजन लागै हाड़ ॥२४॥
कंचन भाजन३ बिष भरा, सो मेरे किस काम ।
दरिया बासन सो भला, जा में अमृत राम ॥२५॥
जो काया कंचन मई, रतनों जड़िया चाम ।
दरिया कहै किस काम का, जो मुख नाहीं राम ॥२६॥
राम सहित मध्यम भला, गलत कोढ़ होय अंग ।
उत्तम कुल को त्याग कर, रहिये उन के संग ॥२७॥
कस्तूरी कूंडे४ भरी, मेली ऊँड़े५ ठाँय ।
दरिया छानी६ क्यों रहै, साख भरै सब गाँव ॥२८॥
कूंड़ा आला७ चाम का, भीतर भरा कपूर ।
दरिया बासन क्या करै, बस्तु दिखावै नूर ॥२९॥
जन दरिया पुन पाप के, थोथे तीराँ जूझ ।
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