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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 33

दरिया सूरज ऊगिया, नैन खुला भरपूर।
जिन अंधे देखा नहीँ, तिन से साहब दूर ॥७॥
दरिया सूरज ऊगिया, चहुँ दिस भया उजास।
राम प्रकासै देह में, तो सकल भरम का नास ॥८॥
पाय बिसारै राम को, भ्रष्ट होत है सोय।
रबि दीपक दोनों बिना, अंधकार ही होय ॥९॥
पाय बिसारै राम को, बैठा सब ही खोय।
दरिया पड़ै अकास चढ़, राखनहार न कोय ॥१०॥
पाय बिसारै राम को, महा अपराधी सोय।
दरिया तीनों लोक में, इसा न दुजा कोय ॥११॥
पाय बिसारै राम को, तीन लोक तल सोय।
जन दरिया अघ जीव का, दिन दिन दूना होय ॥१२॥
बड़ के बड़ लागै नहीं, बड़ के लागै बीज।
दरिया नान्हा होय कर, राम नाम गह चीज ॥१३॥
रसना अंतर वाहिये¹, लोक लाज सब खोय।
दरिया पानी प्रेम का, सींच सहज बड़ होय ॥१४॥
दरिया तीनों लोक में, देखा दोय बिनान।
गुजरानी गुजरान में, गलतानी गलतान ॥१५॥
गुजरानी गलतान की, दरिया ये पहिचान।
ग्यान रता गुजरान सब, कोइ नाम रता गलतान ॥१६॥
सोइ कंथ कबीर का, दादू का महराज।
सब संतन का बालमा, दरिया का सिरताज ॥१७॥
दरिया तीनों लोक में, ढूंढ़ा सबही धाम।
तीर्थ वर्त विधि करत बहु, बिना राम किन काम ॥१८॥
(१) जोतिये।