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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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मिश्रित अंग २६
माला फेरे क्या भया, मन फाटै कर भार ।
दरिया मन को फेरिये, जामें बसे बिकार ॥२३॥
जो मन फेरै राम दिस, कल बिख नासै धोय ।
दरिया माला फेरते, लोग दिखावा होय ॥२४॥
कंठी माला काठ की, तिलक गार का होय ।
जन दरिया निज नाम बिन, पार न पहुँचे कोय ॥२५॥
पाँच सात साखी कही, पद गाया दस दोय ।
दरिया कारज ना सरै, पेट भराई होय ॥२६॥
साँख जोग पपील१ गति, बिघन पड़ै बहु आय ।
बावल२ लागै गिर पड़े, मंजिल न पहुँचे जाय ॥२७॥
भक्ती सार बिहंग गति, जहँ इच्छा तहँ जाय ।
श्री सतगुर रच्छा करें, बिघन न व्यापै ताय ॥२८॥
मिश्रित साखी
दरिया सब जग आँधरा, सूझै सो बेकाम ।
भीतर का नेतर खुला, तबही दरसै राम ॥१॥
दरिया सब जग आँधरा, सूझै नहीं लगार३ ।
औषध है सतसंग का, सतगुरु बोवनहार ॥२॥
दरिया गुरु किरपा करी, सब्द लगाया एक ।
जागत ही चेतन भया, नेतर खुला अनेक ॥३॥
दरिया भागे भरम सब, पाया राम महबूब ।
जाके भान उगै नहीं, दीपक करना खूब ॥४॥
आन धरम दीपक दसा, भरम तिमर होय तास ।
दरिया दीपक क्या करै, [जाके] राम रवी परकास ॥५॥
दरिया सूरज ऊगिया, सब भ्रम गया विलाय ।
उर में गंगा परगटी, सरवर काहे जाय ॥६॥
(१) चींटी । (२) बगुला । (३) पास ।