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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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२८ दरिया साहब मारवाड़
दरिया संगी स्वाँग का, जा का बिकल सरीर ।
मतलब देखै आप का, नहिं जानै पर पीर ॥११॥
दरिया साध और स्वाँग का, क्रोड़ कोस का बीच ।
राम रता साँचा मता, स्वाँग काल की कीच ॥१२॥
दरिया परसै साध को, तो उपजै साँची सीख ।
जो कोई परसै भेष को, ताहि मँगावै भीष ॥१३॥
साध स्वाँग में आँतरा, जैसा दिवस औ रात ।
इनके आसा जगत की, उन को राम सुहात ॥१४॥
साध स्वाँग अस आँतरा, जेता झूठ और साँच ।
मोती मोती फेर बहु, इक कंचन इक काँच ॥१५॥
साध स्वाँग अस आँतरा, जस कामी निःकाम ।
भेष रता ते भीख में, नाम रता ते राम ॥१६॥
भेष बिजूका१ नाम का, कायर को डरपाय ।
दरिया सिंघा ना डरै, जहाँ नाम तहँ जाय ॥१७॥
भेष बिजूका१ नाम का, देखत डरै कुरंग२ ।
दरिया सिंघा ना डरै, भीतर निर्भय अंग ॥१८॥
तम पर भेष बनाय के, मकर पकड़ भया सूर ।
संग लगाया लग रहै, दूर किया होय दूर ॥१६॥
दरिया ऐसा भेष है, जैसा अड़वा३ खेत ।
बाहर चेतन की रहन, भीतर जड़ अचेत ॥२०॥
स्वाँग कहै मैं पेट भराऊँ, डहकाऊँ४ संसार ।
राम नाम जाने बिना, बोरूँ काली धार ॥२१॥
दरिया सब जग आँधरा, सूझ न काज अकाज ।
भेष रता अंधा सबै, अंधाई का राज ॥२२॥
(१) एक जानवर का नाम जो चौपायो के पेट के अंदर घुस कर माँस खा जाता है।
(२) हिरन । (३) काली हाँडी वगैरह जो जानवरों के डराने को खेत में खड़ी कर देतें हैं । (४)
भटकाऊँ ।