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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 30

पारस जाकर लाइये, जाके अंग में गात१।
क्या लावै पाषान को, घस घस होय संताप ॥५॥
दरिया काँटी२ लोह की, पारस परसै सोय ।
धात बस्तु भीतर नहीं, कैसे कंचन होय ॥६॥
भेष का अंग
दरिया काँटी२ भेष सब, भीतर धात न प्रेम ।
कली३ लगावै कपट की, नाम धरावै हेम४ ॥१॥
दरिया काँचे दूध का, बानो सो बन जाय ।
दूध फाट काँजी भई, तहँ गुन कंहाँ समाय ॥२॥
दरिया काँजी भेष है, फाड़ै काँचा दूध ।
अहँग बड़ँग कर आतमा, मेटै साँची सूध ॥३॥
बारह बाटै बहत है, दरिया जगत औ भेष ।
तू बहता सँग मत बहै, रहता साहब देख ॥४॥
दरिया बिल्ली गुरु किया, उज्जल बगु को देख ।
जैसे को तैसा मिला, ऐसा जक्त और भेष ॥५॥
चौकी बैठी काल की, दरिया कलु के भेष ।
इन सबही को पीठ दे, सनमुख साहिब देख ॥६॥
दरिया संगत भेष की, हुई मिटावै साँट५।
परदा घालै राम बिच, करदे बारह बाट ॥७॥
दरिया स्वाँगी भेष का, बागा पाछा६ अंग ।
जैसे कपड़ा पास७ बिन, लागत नहीं रंग ॥८॥
दरिया संगी साध का, अंतर प्रेम प्रकास ।
राम भजै साँचे मते, दूजे धुंध निकास ॥९॥
पिरथम हम यों जानते, स्वाँग धरै सो साध ।
सतगुर से परचा भया, दीसी मोटि विराध ॥१०॥
(१) जौहर । (२) मैल । (३) कलई । (४) सोना । (५) संधि (६) उलटा पलटा । (७) जामन ।