दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 29, कुल 52 में से
संदर्भ में पढ़ेंदरिया साहब मारवाड़
दरिया गुरु दरियाव की, साध चहूँ दिस नहर ।
संग रहै सोई पियै, नहिं फिरै तृषाया बहर ॥२३॥
साध सरोवर राम जल, राग द्वेस कछु नाहिं ।
दरिया पीवै प्रीत कर, सो तिरपत हो जाहि ॥२४॥
जन दरिया गुन गाय ले, बहता अंग सरीर ।
बलिहारी उस अंग की, खैंचा निकसै छीर ॥२५॥
साधू जल का एक अँग, बरतै सहज सुभाव ।
ऊंची दिसा न संचरै, निवन१ जहाँ ढलकाव ॥२६॥
दरिया नाके पोल के, इक पंछी आवै जाय ।
ऐसे साधू जक्त में, बरतैं सहज सुभाय ॥२७॥
मच्छी पंछी साध का, दरिया मारग नाहिं ।
अपनी इच्छा से चलैं, हुकम धनी के माहिं ॥२८॥
साधू चंदन बावना२, [जाके] एक राम की आस ।
जन दरिया इक राम बिन, सब जग आक पलास ॥२६॥
पारस का अंग
जन दरिया षट धात का, पारस कीया नाँव ।
परसा सो कंचन भया, एक रंग इक भाव ॥१॥
दरिया छुरी कसाब की, पारस परसै आय ।
लोह पलट कंचन भया, आमिष३ अखान जाय ॥२॥
लोह काला भीतर कठिन, पारस परसै सोय ।
उर नरमी अति निरमला, बाहर पीला होय ॥३॥
पारस परसा जानिये, जो उलटै अँग अंग ।
अँग अंग पलटै नहीं, तौ है झूठा संग ॥४॥
(१) नीचा । (२) बावना चंदन उस अमल चंदन को कहते हैं जिस के पास के दरख्त
मलियागिर पर मय सुगंधित हो जाते हैं । (३) माँस ।