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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

उपदेश का अङ्ग २५
भेड़ गती संसार की, हारे गिनै न हार ।
देखा देखि परबत चढ़ै, देखा देखी खाड़१ ॥११॥
दरिया सौ अंधा बिचै, एक सुभाको जाय ।
वह तो बात देखी कहै, वा के नाहीं दाय२ ॥१२॥
दरिया सारा३ अंध को, कहै देख देख कुछ देख ।
अंध कहै सूझै नहीं, कोइ पूरबला लेख ॥१३॥
कंचन कंचन ही सदा, काँच काँच सो काँच ।
दरिया झूठ सो झूठ है, साँच साँच सो साँच ॥१४॥
जन दरिया निज साँच का, साँचा ही ब्यौहार ।
झूठ झूठ ही नीवड़ै, जा में फेर न सार ॥१५॥
दरिया साँच न संचरै, जब घर घालै झूठ ।
साँच आन परगट हुआ, जब झूठ दिखावै पीठ ॥१६॥
जन दरिया इस झूठ की, डागल४ ऊपर दौड़ ।
साँचि दौड़ चौगान में, सो संताँ सिर मौर ॥१७॥
कानों सुनी सो झूठ सब, आँखों देखी साँच ।
दरिया देखे जानिये, यह कंचन यह काँच ॥१८॥
साध पुरुष देखी कहैं, सुनी कहैं नहिं कोय ।
कानों सुनी सो झूठ सब, देखी साँची होय ॥१६॥
दरिया आगे साँच के, झूठ किती इक बात ।
जैसे ऊगे भान के, रात अँधारी जात ॥२०॥
दरिया साँचा राम है, और सकल ही झूठ ।
उनमुख रहिये राम से, दे सबही को पीठ ॥२१॥
दरिया साँचा राम है, फिर साँचा है संत ।
यह तो दाता मुक्ति का, वह मुख नाम कहंत ॥२२॥
(१) गढ़ा । (२) पसंद । (३) सिगरा । (४) छत ।
४