दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआइ पारख छेदन भया, मन दे लीना मोल।
गाँठ बाँध भीतर धरा, मिट गइ डाँवाँडोल ॥४॥
कंकर बाँधा गाँठड़ी, कर हीरा का भाव।
खोला कंकर नीसरा, झूठा यही सुभाव ॥५॥
उपदेश का अंग
जन दरिया उपदेस दे, जा के भीतर चाय।
नातर गैला१ जगत से, बक बक मरै बलाय ॥१॥
दरिया बहु बकवाद तज, कर अनहद से नेह।
औंधा कलसा ऊपरे, कहा बरसावै मेह ॥२॥
बिरही प्रेमी मोम-दिल, जन दरिया निःकाम।
आसिक दिल दीदार का, जासे कहिये राम ॥३॥
जन दरिया उपदेस दे, [जाके] भीतर प्रेम सधीर।
गाहक होय कोइ हींग का, [जाको] कहा दिखावै हीर ॥४॥
दरिया गैला१ जगत से, समझऔ मुख से बोल।
नाम रतन की गाँठड़ी, गाहक बिन मत खोल ॥५॥
दरिया गैला जगत को, क्या कीजै समझाय।
चलना है दिस उतर को, दखिन दिस को जाय ॥६॥
दरिया गैला जगत को, कैसे दीजै सीख।
सौ कोसाँ चालन करै, चाल न जानै बीख२ ॥७॥
दरिया गैला जगत को, कैसे दीजै हेत।
जो सौ बेरा छानिये, तौहू रेत की रेत ॥८॥
दरिया गैला जगत को, क्या कीजै सुलझाय।
सुलझाया सुलझै नहीं, फिर सुलझ सुलझ उलझाय ॥९॥
दरिया गैला जगत को, क्या कीजै समझाय।
रोग नीसरै देह में, पत्थर पूजन जाय ॥१०॥
(१) बावला। (२) कदम।