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दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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२१
सुपने का अंग
सुपने का अंग
दरिया सोता सकल जग, जागत नाहीं कोय ।
जागे में फिर जागना, जागा कहिये सोय ॥१॥
साध जगावे जीव को, मत१ कोइ उठै जाग ।
जागे फिर सोवै नहीं, जन दरिया बड़ भाग ॥२॥
माया मुख जागै सबै, सो सूता कर जान ।
दरिया जागै ब्रह्म दिस, सो जागा परमान ॥३॥
दरिया तो साँची कहै, झूठ न मानै कोय ।
सब जग सुपना नींद में, जान्या जागन होय ॥४॥
साँख जोग नवधा भगति, यह सुपने की रीत ।
दरिया जागै गुरुमुखी, [जाकी] तत्तनाम से प्रीत ॥५॥
दरिया सतगुर कृपा कर, सब्द लगाया एक !
जागत ही चेतन भया, नेतर खुला अनेक ॥६॥
॥ राग भैरव ॥
सब जग सोता सुध नहिं पावै, बोलै सो सोता बरड़ावै ॥टेक॥
संसय मोह भरम की रैन, अंध धुंध होय सोते ऐन ॥१॥
जप तप सँजम औ आचार, यह सब सुपने के व्यौहार ॥२॥
तीर्थ दान जग प्रतिमा सेवा, यह सब सपना लेवा देवा ॥३॥
कहना सुनना हार औ जीत, पक्षा पछी सपनो बिपरीत ॥४॥
चार बरन और आसम चार, सपना अंतर सब व्योहार ॥५॥
खट दरसन आदि भेद भाव, सपना अंतर सब दरसाव ॥६॥
राजा राना तप बलवंता, सपना माहीं सब बरतंता ॥७॥
पीर औलिया सबै सयाना, ख्वाब माहिं बरतै बिध नाना ॥८॥
काजी सैयद औ सुलताना, ख्वाब माहिं सब करत पयाना ॥६॥
साँख जोग औ नौधा भक्ती, सपना में इनकी इक बिरती ॥१०॥
(१) कदाचित ।

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