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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 23

२० दरिया साहब मारवाड़
हंस उदास का अंग
कबहुक भरिया समुंद सा, कबहुक नाहीं छाँट१।
जन दरिया इत उत रता, ते कहिये किरकाँट२॥१॥
किरकाँटा किस काम का, पलट करै बहु रंग।
जन दरिया हंसा भला, जद तद एकै रंग॥२॥
एक रंग उलटी दसा, भीतर भरम न भाज।
जन दरिया निज दास का, तन मन मता मराल३॥३॥
दरिया हंसा ऊजला, बगुलहु उज्जल होय।
दोनों एकहि सारिखा, पर चेजै४ पारष५ जोय॥४॥
दरिया बगुला ऊजला, उज्जल ही होय हंस।
वे सरवर मोती चुगैं, वा के मुख में मंस॥५॥
वा का चेजा४ ऊजला, वा का खाज निषेद।
जन दरिया कैसे बनै, हंस बगुल के भेद॥६॥
जन दरिया हंसा तना६, देख बड़ा ब्यौहार।
तन उज्जल मन ऊजला, उज्जल लेत अहार॥७॥
बाहर से उज्जल दसा, भीतर मैला अंग।
ता सेती कौवा भला, तन मन एकहि रंग॥८॥
बाहर से उज्जल दसा, अंतर उज्जल होय।
दरिया सोना सोल्हवाँ७, काँट८ न लागै कोय॥९॥
मानसरवर मोती चुगै, दूजा नाहीं खान।
दरिया सुमिरै राम को, सो निज हंसा जान॥१०॥
मानसरोवर वासिया, छीलर९ रहै उदास।
जन दरिया भज राम को, जब लग पिंजर साँस॥११॥


(१) छींटा। (२) गिरगिट। (३) हंस। (४) चुगा यानी खुराक। (५) परीक्षा। (६) का।
(७) खरा। (८) जंग। (९) तलैया।