दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाव करम सुख दुख नहीं, नहिं कोइ पुन्न न पाप ।
दरिया देखै सुन्न चढ़, जहँ आपहि उर रहा आप ॥३७॥
अगम दरीचा अगम घर, जहँ कोइ रूप न रेख ।
जहँ दरिया दुबिधा नहीं, स्वामी सेवक एक ॥३८॥
सुन्न मँडल में परघटा, प्रेम कथा परकास ।
बकता देव निरंजना, स्रोता दरियादास ॥३६॥
पंछी ऊड़ै गगन में, खोज¹ मँडै² नहिं माहिं ।
दरिया जल में मीन गति, मारग दरसै नाहिं ॥४०॥
मन बुध चित पहुँचै नहीं, सब्द सकै नहिं जाय ।
दरिया धन वे साधवा, जहाँ रहे लौ लाय ॥४१॥
दरिया सुन्न समाध की, महिमा घनी अनंत ।
पहुँचा सोई जानसी, कोइ कोइ बिरला संत ॥४२॥
एक एक को ध्याय कर, एक एक आराध ।
एक एक से मिल रहे, जाका नाम समाध ॥४३॥
भाव मिले परभाव से, परभाये पर भाय ।
दरिया मिलकर मिल रहे, तो आवा गवन नसाय ॥४४॥
पाँच तत्त गुन तीन से, आतम भया उदास ।
सरगुन निरगुन से मिला, चौथे पद में बास ॥४५॥
माया तहाँ न संचरै, जहाँ ब्रह्म का खेत ।
जन दरिया कैसे बनै, रवि रजनी का मेल ॥४६॥
जीव जात से बीछुड़ा, धर पंच तत्त का भेख ।
दरिया निज घर आइया, पाया ब्रह्म अलेख ॥४७॥
जात हमारी ब्रह्म है, मात पिता है राम ।
गिरह हमारा सुन्न में, अनहद में बिसराम ॥४८॥
(१) निशान । (२) पड़ता ।