दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ दरिया साहब मारवाड़
पाप पुन्न सुख दुख नहीं, जहँ कोइ कर्म न काल ।
जन दरिया जहँ पड़त है, हीरों की टकसाल ॥२५॥
सुरत निरत परचा भया, अरस परस मिलि एक ।
जन दरिया बानक¹ बना, मिट गया जन्म अनेक ॥२६॥
तज बिकार आकार तज, निराकार को ध्याय ।
निराकार में पैठकर, निराधार लौ लाय ॥२७॥
सुरत मिली जाय ब्रह्म से, अपनो इष्ट सँभाल ।
जन दरिया अनुभौ सबद, जहँ दीखै काल बिसाल ॥२८॥
सुरत मिली जाय ब्रह्म से, मन बुध को दे पूठ ।
जन दरिया जहँ देखिये, कथनी बदनी झूठ ॥२६॥
दरिया जहँ लग गगन है, तहँ लग सुरत निवास ।
इनके आगे सुन्न है, जहँ प्रेम भाव परकास ॥३०॥
दरिया अनहद अगिन का, अनुभौ धूवाँ जान ।
दूरा सेती देखिये, परसे होय पिछान ॥३१॥
मान बड़ा अनुभौ सबद, दूर देसाँतर जाय ।
अनहद मेरा साइयाँ, घट में रहा समाय ॥३२॥
प्रथम ध्यान अनुभौ करै, जा से उपजै ज्ञान ।
दरिया बहुते करत हैं, कथनी में गुजरान ॥३३॥
अनुभौ झूठी थोथरी, निर्गुन सच्चा नाम ।
परम जोत परचै भई, तो धूवाँ से क्या काम ॥३४॥
आँखों से दीखै नहीं, सब्द न पावै जान ।
मन बुध तहँ पहुँचे नहीं, कौन कहै सेलान² ॥३५॥
भाव मिलै परभाव से, धर कर ध्यान अखंड ।
दरिया देखै ब्रह्म को, न्यारा दीखै पिंड ॥३६॥
(१) औमर । (२) निशान ।