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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 18

नाद परचे का अङ्ग १५
अमी भरत बिगसत कँवल, उपजत अनुभव ज्ञान।
जन दरिया उस देस का, भिन भिन करत बखान ॥२३॥
सुरत गगन में बैठ कर, पति का ध्यान सँजोय।
नाड़ि नाड़ि रूँ रूँ बिषे१, ररंकार धुन होय ॥२४॥
बिन पावक पावक जलै, बिन सूरज परकास।
चाँद बिना जहँ चाँदना, जन दरिया का बास ॥२५॥
नौबत बाजै गगन में, बिन बादल घन गाज।
महल बिराजैं परम गुरु, दरिया के महराज ॥२६॥
कंचन का गिर देख कर, लोभी भया उदास।
जन दरिया थाके बनिज, पूरी मन की आस ॥२७॥
ब्रह्म अगिन ऊपर जलै, चलत प्रेम की बाय।
दरिया सीतल आतमा, [जाका] कर्म कंद२ जल जाय ॥२८॥
कहा कहै किरपा करी, कहै रहै कोइ रूठ।
जन दरिया बानक३ बना, राम ठपोरी पीठ४ ॥२६॥
दरिया त्रिकुटी महल में, भई उदासी मोय।
जहँ सुख है तहँ दुख सही, रबि जहँ रजनी होय ॥३०॥
दरिया मन रंजन कहे, सुखी होत सब कोय।
मीठे औगुन ऊपजै, कडुवा से गुन होय ॥३१॥
मीठे राचै लोग सब, मींठे उपजै रोग।
निरगुन कडुवा नीम सा, दरिया दुर्लभ जोग ॥३२॥
त्रिकुटी के मँझ बहत है, सुख की सलिता जोर।
जन दरिया सुख दुख परे, वह कोइदेस जो और ॥३३॥
त्रिकुटी माहीं सुख घना, नाहीं दुख का लेस।
जन दरिया सुख दुख नहीं, वह कोइ अनुभव देस ॥३४॥
(१) में। (२) पुत्ती, जड़। (३) संजोग। (४) पीठ ठोका।