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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 17

१४ दरिया साहब मारवाड़
दरिया मेरु उलंघ कर, पहुँचा त्रिकुटी सन्ध ।
दुख भाजा सुख ऊपजा, मिटा भर्म का धुन्ध ॥११॥
अनंतहि चंश ऊगिया, सूर्य कोटि परकास ।
बिन बादल बरषा घनी, छह ऋतु बारह मास ॥१२॥
बंक नाल की सुध गहै, कोइ पहुँचै बिरला सन्त ।
अमी फिरै जोत झिलमिलै, नौबत घुरै अनन्त ॥१३॥
दरिया मन परमन भया, बैठा त्रिकुटी छाजै ।
अमी फिरै बिगसै कँवल, अनहद धुन गाजै ॥१४॥
दरिया त्रिकुटी सन्ध में, मन ध्यान धरै कर धीर ।
अवस चलत है सुषमना, चलत प्रेम की सीर ॥१५॥
चलै सुरसरी१ अगम की, हिरदे मंझ समाय ।
जन दरिया वा सुषमना, रोम रोम हो जाय ॥१६॥
दरिया नाद प्रकासिया, सो छबि कही न जाय ।
धन्य धन्य वे साधवा, वहाँ रहे लौ लाय ॥१७॥
दरिया नाद प्रकासिया, पूरी मन की आस ।
घन बरसै गाजै गगन, तेज पुंज परकास ॥१८॥
दरिया नाद प्रकासिया, [तहँ] किया निरंतर बास ।
पारब्रह्म परसा सही, जहँ दरसन पावै दास ॥१९॥
जन दरिया जाय गगन में, परसा देव अनाद ।
असुध बीसरी सुध भई, मिटिया वाद विवाद ॥२०॥
घुरै नगारा गगन में, बाजै अनहद तूर ।
जन दरिया जहँ थिति रची, निस दिन बरसै नूर ॥२१॥
जन दरिया जाय गगन में, किया सुधा रस पान ।
गंग बहै जहँ अगम की, जाय किया असनान ॥२२॥
(१) गंगा ।