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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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सूर का अंग
भया उजाला गैब का, दैड़े देख पतंग ।
दरिया आपा मेटकर, मिले अगिन के रंग ॥१३॥
दरिया प्रेमी आत्मा, आवै सतगुर संग ।
सतगुर सेती सब्द ले, मिलै सब्द के रंग ॥१४॥
दरिया प्रेमी आत्मा, राम नाम धन पाया ।
निरधन था धनवँत हुवा, भूला घर आया ॥१५॥
सूरा खेत बुहारिया, सतगुर के बिस्वास ।
सिर ले सौंपा राम को, नहिं जीवन की आस ॥१६॥
दरिया खेत बुहारिया, चढ़ा दई की गोद ।
कायर काँपै खड़बड़ै, सूरा के मन मोद ॥१७॥
सूर बीर साँची दसा, भीतर साँचा सूत ।
पूठ¹ फिरै नहिं मुख मुड़ै, राम तना रजपूत ॥१८॥
साध सूर का एक अँग, मना न भावै झूठ ।
साध न छाँड़ै राम को, रन में फिरै न पूठ ॥१९॥
सूर बीर की सभा में, कायर बैठे आय ।
सूरातन आवै नहीं, कोटि भाँति समुझाय ॥२०॥
सूर बीर की सभा में, जो कोइ बैठे सूर ।
सुनत बात सुख ऊपजै, चढ़ै सवाया नूर ॥२१॥
आगे बढ़ै फिरै नहीं, यह सूरा की रीत ।
तन मन अरपै राम को, सदा रहै अघ जीत ॥२२॥
सूर न जानै कायरी, सूरातन से हेत ।
पुरजा पुरजा हो पड़ै, तहू न छाँड़ै खेत ॥२३॥
सूर सदा है सनमुखी, मन में नाहीं संक ।
आपा अरपै राम को, तो बाल न होवै बंक ॥२४॥
(१) पीठ ।