सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 52 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 13

१० दरिया साहब मारवाड़
सूर का अंग
इष्टी स्वाँगी बहु मिले, हिरसी मिले अनंत।
दरिया ऐसा ना मिला, राम रता कोइ संत ॥१॥
पंडित ज्ञानी बहु मिले, बेद ज्ञान परबीन।
दरिया ऐसा ना मिला, राम नाम लवलीन ॥२॥
बक्ता स्रोता बहु मिले, करते खैंचा तान !
दरिया ऐसा ना मिला, जो सन्मुख झेले बान ॥३॥
दरिया बान गुरदेव का, बेधै भरम बिकार।
बाहर घाव दीखै नहीं, भीतर भया सिमार¹ ॥४॥
दरिया बान गुरदेव का, कोइ झेलै सूर सधीर।
लागत ही ब्यापै सही, रोम रोम में पीर ॥५॥
सोई घाव तन पर लगै, उठ्ठ सँभालै साज।
चोट सहारे सब्द की, सो सूरा सिरताज ॥६॥
चोट सहै उर सेल की, मुख ज्यों का त्यों नूर।
चोट सहारै सब्द की, दरिया साँचा सूर ॥७॥
दरिया सूरा गुरमुखी, सहै सब्द का घाव।
लागत ही सुध बीसरे, भूलै आन सुभाव ॥८॥
दरिया साँचा सूरमा, सहै सब्द की चोट।
लागत ही भाजै भरम, निकस जाय सब खोट ॥६॥
दरिया सस्तर बाँध कर, बहुत कहावैं सूर।
सूरा तब ही जानिये, अनी² मिले मुख नूर ॥१०॥
सबहि कटक³ सूरा नहीं, कटक माहिं कोइ सूर।
दरिया पड़े पतंग ज्यों, जब बाजै रन तूर ॥११॥
पड़ै पतंगा अगिन में, देह की नाहिं सँभाल।
दरिया सिप सतगुर मिलै, तो हो जाय निहाल ॥१२॥
(१) मिस्मार, चकनाचूर। (२) नोक, घाव। (३) फ़ौज।