दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५ दरिया साहब मारवाड़
सूर बीर साँची दसा, कबहु न मानै हार ।
अनी मिलै आगे धसै, सनमुख झेलै सार१ ॥२५॥
सूरा के सिर साम२ है, साधों के सिर राम ।
दूजी दिस ताकैं नहीं, पड़ै जो कड़ड़ा काम ॥२६॥
सूर चढ़ै संग्राम को, मन में संक न कोय ।
आपा अरपै राम को, मन में संक न कोय ॥२७॥
सूरा खेत बुहारिया, भरम मनी कर चूर ।
आय बिराजा राम जी, दुर्जन भाजा दूर ॥२८॥
पीछे पाँव धरै नहीं, सूरा बड़ा सुभाव ।
हूँ करिया आगे धसै, कायर खेलै दाँव ॥२६॥
साध सुरग चाहै नहीं, नरकाँ दिस नहिं जाय ।
पारब्रह्म के पार लग, पटा गैब का खाय ॥३०॥
पटा पत्रड़िया३ ना लहै, पटा लहै कोइ सूर ।
साखियाँ साहब ना मिलै, भजन किये भरपूर ॥३१॥
दरिया सुमिरन राम का, सूराँ हंदा साज ।
आगे पीछे होय नहीं, वाहि धनी की लाज ॥३२॥
दरिया सो सूरा नहीं, जिन देह करी चकचूर ।
मन को जीत खड़ा रहै, मैं बलिहारी सूर ॥३३॥
सिंधु४ बजा सूरा भिड़ा, बिरद५ वखानै भाट ।
हला मेरु६ धूजी धरा, खुली सुरग की बाट ॥३४॥
बाट खुली जब जानिये, अंतर भया उजास ।
जो कुछ थी सो ही बनी, पूरी मन की आस ॥३५॥
दरिया साँचा सूरमा, अरि दल७ घालै चूर ।
राज घरपिया८ राम का, नगर बसा भरपूर ॥३६॥
(१) लोहा । (२) हथियार का नाम । (३) दरबान । (४) फौजी बाजा । (५) तारीफ ।
(६) पहाड़ । (७) दुश्मन की फौज । (८) थापा ।