दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८ दरिया साहब मारवाड़
दरिया काया कारवी १, मौसर है दिन चार ।
जब लग साँस सरीर में, तब लग राम सँभार ॥३४॥
राम नाम रसना रटै, भीतर सुमिरै मन ।
दरिया ये गत साध की, पाया नाम रतन ॥३५॥
दरिया दूजे धर्म से, संसय मिटै न सूल ।
राम नाम रटता रहै, सर्व धर्म का मूल ॥३६॥
लख चौरासी भुगत कर, मानुष देह पाई ।
राम नाम ध्याया नहीं, तो चौरासी आई ॥३७॥
दरिया नाके नाम के, बिरला आवै कोय ।
जो आवै तो परम पद, आवागवन न होय ॥३८॥
दरिया राम अगाध है, आतम का आधार ।
सुमिरत ही सुख उपजै, सहजहि मिटै बिकार ॥३६॥
दरिया राम संभालता, देख किता गुन होय ।
आवागवन का दुख मिटै, ब्रह्म परायन सोय ॥४०॥
मरना है रहना नहीं, जा में फेर न सार ।
जन दरिया भय मान कर, आपन राम सँभार ॥४१॥
कहा कोई बन बन फिरै, कहा लियाँ कोइ फौज ।
जन दरिया निज नाम बिन, दिन दस मन की मौज ॥४२॥
दरिया आतम मल भरा, कैसे निर्मल होय ।
सावन लावै प्रेम का, राम नाम जल धोय ॥४३॥
दरिया इस संसार में, सुखी एक है संत ।
पिये सुधारस प्रेम से, राम नाम निज तंत ॥४४॥
राम नाम निस दिन रटै, दूजा नाहीं दाँय ।
दरिया ऐसे साध की, मैं बलिहारी जाँय ॥४५॥
(१) कूँडी ।