सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4
दादू देही मांहि दोइ दिल, इक खाकी इक नूर।
खाकी दिल सूझै नहीं, नूरी मंझि हजूर ॥ 227 ॥
नमाज सिजदा
दादू हौज हजूरी दिल ही भीतरि, गुसल हमारा सारं ।
उजू साजि अलह के आगे, तहाँ नमाज गुजारं ॥ 228 ॥
दादू काया मसीत कर पंच जमाती, मन ही मुल्ला इमामं ।
आप अलेख इलाही आगे, तहँ सिजदा करे सलामं ॥ 229 ॥
दादू सब तन तसबी कहै करीमं, ऐसा करले जापं ।
रोजा एक दूर कर दूजा, कलमा आपै आपं ॥ 230 ॥
दादू आठों पहर अलह के आगै, इकटक राहिबा ध्यानं ।
आपै आप अर्श के ऊपर, जहाँ रहै रहमानं ॥ 231 ॥
दादू अट्ठे पहर इबादती, जीवण मरण निबाहि ।
साहिब दर सेवै खड़ा, दादू छाड़ि न जाहि ॥ 232 ॥
साधु महिमा महात्म
अट्ठे पहर अर्श में, ऊभोई आहे ।
दादू पसे तिनके, अल्लह गाल्हाये ॥ 233 ॥
अट्ठे पहर अर्श में, बैठा पीरी पसन्नि ।
दादू पसे तिन्न के, जे दीदार लहन्नि ॥ 234 ॥
अट्ठे पहर अर्श में, जिन्हीं रूह रहन्नि ।
दादू पसे तिन्न के, गुझ्यूं गाल्हि कन्नि ॥ 235 ॥
अट्ठे पहर अर्श में, लुड़ींदा आहीन ।
दादू पसे तिन्न के, असां खबर दीन ॥ 236 ॥
अट्ठे पहर अर्श में, वजी जे गाह्रीन ।
दादू पसे तिन्न के, कितेई आहीन ॥ 237 ॥
रस प्रेम प्याला
प्रेम प्याला नूर का, आशिक भर दीया ।
दादू दर दीदार में, मतवाला कीया ॥ 238 ॥
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