सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4
नैन हमारे नूर मां, तहाँ रहै ल्यौ लाइ ।
दादू उस दीदार को, निसदिन निरखत जाइ ॥ 98 ॥
दादू नैनहुँ आगे देखिये, आत्म अंतर सोइ ।
तेज पुंज सब भरि रह्या, झिलमिल झिलमिल होइ ॥ 99 ॥
अनहद बाजे बाजिये, अमरापुरी निवास ।
जोति स्वरूपी जगमगै, कोइ निरखै निज दास ॥ 100 ॥
परम तेज तहँ मन रहे, परम नूर निज देखे ।
परम जोति तहँ आतम खेले, दादू जीवन लेखे ॥ 101 ॥
दादू जरै सु जोति स्वरूप है, जरै सु तेज अनंत ।
जरै सु झिलमिल नूर है, जरै सु पुंज रहंत ॥ 102 ॥
परिचय पति पहचान
सतगुरु अलख अलाह का, कहु कैसा है नूर ।
दादू बेहद हद नहीं, सकल रह्या भरपूर ॥ 103 ॥
वार पार नहिं नूर का, दादू तेज अनंत ।
कीमत नहीं करतार की, ऐसा है भगवंत ॥ 104 ॥
निरसंध नूर अपार है, तेज पुंज सब मांहि ।
दादू जोति अनंत है, आगो पीछो नांहि ॥ 105 ॥
खंड खंड निज ना भया, एकलस एकै नूर ।
ज्यूं था त्यूं ही तेज है, ज्योति रही भरपूर ॥ 106 ॥
परम तेज प्रकास है, परम नूर निवास ।
परम ज्योति आनन्द में, हंसा दादू दास ॥ 107 ॥
परिचय साक्षात्कार
नूर सरीखा नूर है, तेज सरीखा तेज ।
ज्योति सरीखी ज्योति है, दादू खेलै सेज ॥ 108 ॥
तेज पुंज की सुन्दरी, तेज पुंज का कंत ।
तेज पुंज की सेज पर, दादू बन्या बसंत ॥ 109 ॥
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