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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 504 में से

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पृष्ठ 60

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2

ताला बेली प्यास बिन, क्यों रस पीया जाइ ।
विरहा दर्शन दर्द सौं, हमको देहु खुदाइ ॥ 48 ॥
ताला बेली पीड़ सौं, विरहा प्रेम पियास ।
दर्शन सेती दीजिये, बिलसै दादू दास ॥ 49 ॥
दादू कहै, हमको अपणां आप दे, इश्क मुहब्बत दर्द ।
सेज सुहाग सुख प्रेम रस, मिल खेलैं लापर्द ॥ 50 ॥
प्रेम भगति माता रहै, ताला बेली अंग ।
सदा सपीड़ा मन रहै, राम रमै उन संग ॥ 51 ॥
प्रेम मगन रस पाइये, भक्ति हेत रुचि भाव ।
विरह बेसास निज नाम सौं, देव दया कर आव ॥ 52 ॥
गई दशा सब बाहुड़ै, जे तुम प्रकटहु आइ ।
दादू ऊजड़ सब बसै, दर्शन देहु दिखाइ ॥ 53 ॥
हम कसिये क्या होइगा, बिड़द तुम्हारा जाइ ।
पीछै ही पछिताहुगे, ताथैं प्रकटहु आइ ॥ 54 ॥
छिन बिछोह
मीयां मैंडा आव घर, वांढी वंता लोइ ।
डुखंडे मुहिंडे गये, मरां विच्छौहे रोइ ॥ 55 ॥
विरह पतिव्रत
है, सो निधि नहिं पाइये, नहीं, सो है भरपूर ।
दादू मन मानै नहीं, ताथैं मरिये झूर ॥ 56 ॥
विरही विरह लक्षण
जिस घट इश्क अलाह का, तिस घट लोही न मांस ।
दादू जियरे जक नहीं, ससकै सांसैं सांस ॥ 57 ॥
रत्ती रब्ब ना बीसरै, मरै संभाल संभाल ।
दादू सुहदा थीर है,आसिक अल्लह नाल ॥ 58 ॥

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