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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 504 में से

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पृष्ठ 58

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
देह पियारी जीव को, जीव पियारा देह।
दादू हरि रस पाइये, जे ऐसा होइ स्नेह ॥ 26 ॥
प्रेमा भक्ति के बिना सब फीका है
दादू हरदम मांहि दिवान, सेज हमारी पीव है।
देखूँ सो सुबहान, ये इश्क हमारा जीव है ॥ 27 ॥
दादू हरदम मांहि दिवान, कहूँ दरूने दर्द सौं।
दर्द दरूने जाइ, जब देखूँ दीदार कों ॥ 28 ॥
विरह विनती
दादू दरूने दर्दबंद, यहु दिल दर्द न जाइ।
हम दुखिया दीदार के, महरबान दिखलाइ ॥ 29 ॥
मूये पीड़ पुकारतां, बैद न मिलिया आइ।
दादू थोड़ी बात थी, जे टुक दर्श दिखाइ ॥ 30 ॥
दादू मैं भिखारी मंगता, दर्शन देहु दयाल।
तुम दाता दुख भंजता, मेरी करहु संभाल ॥ 31 ॥
छिन बिछोह
क्या जीये में जीवना, बिन दर्शन बेहाल।
दादू सोई जीवना, प्रकट परसन लाल ॥ 32 ॥
इहि जग जीवन सो भला, जब लग हिरदै राम।
राम बिना जे जीवना, सो दादू बेकाम ॥ 33 ॥
विरह विनती
दादू कहु दीदार की, सांई सेती बात।
कब हरि दरशन देहुगे, यहु औसर चलि जात ॥ 34 ॥
बिथा तुम्हारे दर्श की, मोहि व्यापै दिन रात।
दुखी न कीजे दीन को, दर्शन दीजे तात ॥ 35 ॥
दादू इस हियड़े ये साल, पीव बिन क्योंहि न जाइसी।
जब देखूँ मेरा लाल, तब रोम रोम सुख आइसी ॥ 36 ॥

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