सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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विरह का अंग
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अथ विरह का अंग-३
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ।। 1 ।।
रतिवंती आरति करै, राम सनेही आव।
दादू औसर अब मिलै, यहु विरहनी का भाव ।। 2 ।।
विरहिनी की विरह दशा और उसका विलाप
पीव पुकारै विरहनी, निशदिन रहे उदास।
राम राम दादू कहै, ताला-बेली प्यास ।। 3 ।।
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