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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 504 में से

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पृष्ठ 49

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
मध्य मार्ग
ना घर भला न वन भला, जहाँ नहीं निज नाँव।
दादू उनमनी मन रहै, भला तो सोई ठाँव ॥ 78 ॥
निर्गुण नाम महिमा महात्तम
दादू निर्गुणं नामं मई, हृदय भाव प्रवर्तितम्।
भ्रमं कर्म किल्विषं, माया मोहं कंपितम् ॥ 79 ॥
कालं जालं सोचितं, भयानक यम किंकरम्।
हर्षं मुदितं सदगुरुं, दादू अविगत दर्शनम् ॥ 80 ॥
भगवद् दर्शन का अनुपम माहात्म्य
दादू सब सुख स्वर्ग पयाल के, तोल तराजू बाहि।
हरि सुख एक पलक का, ता सम कह्या न जाहि ॥ 81 ॥
स्मरण नाम पारिख लक्षण
दादू राम नाम सब को कहै, कहिबे बहुत विवेक।
एक अनेकों फिर मिले, एक समाना एक ॥ 82 ॥
स्थूल रीति से राम-नाम स्मरण में भेद
दादू अपणी अपणी हद में, सब कोई लेवे नाउँ।
जे लागे बेहद सौं, तिन की मैं बलि जाउँ ॥ 83 ॥
स्मरण नाम अगाधता
कौण पटंतर दीजिये, दूजा नाहीं कोइ।
राम सरीखा राम है, सुमिऱ्यां ही सुख होइ ॥ 84 ॥
अपणी जाणै आप गति, और न जाणै कोइ।
सुमरि सुमरि रस पीजिये, दादू आनन्द होइ ॥ 85 ॥
करणी बिना कथणी
दादू सबही वेद पुराण पढ़ि, नेटि नाम निर्धार।
सब कुछ इन ही मांहि है, क्या करिये विस्तार ॥ 86 ॥

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