सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
है सो सुमिरण होत नहीं, नहीं सो कीजै काम ।
दादू यहु तन यूँ गया, क्यूँ कर पड्ये राम ॥ 68 ॥
स्मरण नाम महिमा माहात्म्य
दादू राम नाम निज मोहनी, जिन मोहे करतार ।
सुर नर शंकर मुनि जना, ब्रह्मा सृष्टि विचार ॥ 69 ॥
दादू राम नाम निज औषधि, काटै कोटि विकार ।
विषम व्याधि थैं ऊबरै, काया कंचन सार ॥ 70 ॥
दादू निर्विकार निज नांव ले, जीवन इहै उपाय ।
दादू कृत्रिम काल है, ताके निकट न जाय ॥ 71 ॥
स्मरण
मन पवना गहि सुरति सौं, दादू पावै स्वाद ।
सुमिरण माहिं सुख घणा, छाड़ि देहु बकवाद ॥ 72 ॥
माया प्रपंच का त्याग
नाम सपीड़ा लीजिए, प्रेम भगति गुण गाइ ।
दादू सुमिरण प्रीति सौं, हेत सहित ल्यौ लाइ ॥ 73 ॥
लय लगाने की विधि
प्राण कवल मुख राम कहि, मन पवना मुख राम ।
दादू सुरति मुख राम कहि, ब्रह्म शून्य निज ठाम ॥ 74 ॥
दादू कहतां सुणातां राम कह, लेतां देतां राम ।
खातां पीतां राम कह, आत्म कवल विश्राम ॥ 75 ॥
ज्यूं जल पैसे दूध में, ज्यूं पाणी में लौण ।
ऐसे आत्माराम सौं, मन हठ साधै कौण ॥ 76 ॥
दादू राम नाम में पैस कर, राम नाम ल्यौ जाइ ।
यहु इंकत त्रिय लोक में, अनत काहे को जाइ ॥ 77 ॥
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