सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
नाम अगाधता
पढ़ि पढ़ि थाके पंडिता, किनहुँ न पाया पार ।
कथि कथि थाके मुनिजना, दादू नाम आधार ॥ 87 ॥
निगम हि अगम विचारिये, तऊ पार न आवै ।
ताथैं सेवग क्या करै, सुमिरण ल्यौ लावै ॥ 88 ॥
कथनी बिना करणी
दादू अलिफ एक अल्लाह का, जे पढ़ि जाणै कोइ ।
कुरान कतेबां इल्म सब, पढकर पूरा होइ ॥ 89 ॥
दादू यहु तन पिंजरा, मांहीं मन सूवा ।
एक नाम अल्लाह का, पढ़ि हाफिज हूवा ॥ 90 ॥
स्मरण नाम पारख लक्षण
नाम लिया तब जानिए, जे तन मन रहै समाइ ।
आदि अंत मधि एक रस, कबहूँ भूल न जाइ ॥ 91 ॥
विरह पतिव्रत
दादू एकै दशा अनन्य की, दूजी दशा न जाइ ।
आपा भूलै आन सब, एकै रहै समाइ ॥ 92 ॥
दादू पीवै एक रस, बिसरि जाइ सब और ।
अविगत यहु गति कीजिये, मन राखो इहि ठौर ॥ 93 ॥
आत्म चेतन कीजिए, प्रेम रस पीवै ।
दादू भूलै देह गुण, ऐसैं जन जीवै ॥ 94 ॥
स्मरण नाम अगाधता
कहि कहि केते थाके दादू, सुणि सुणि कहु क्या लेइ ।
लौंण मिलै गलि पाणियां, ता सम चित यों देइ ॥ 95 ॥
दादू हरि रस पीवतां, रती विलम्ब न लाइ ।
बारम्बार संभालिये, मति वै बीसरि जाइ ॥ 96 ॥
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