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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 485

राग धनाश्री
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अथ राग धना श्री २४
(गायन समय दिन ३ से ६)
५14. अमिट अविनाशी रंग । धीमा ताल
रंग लागो रे राम को, सो रंग कदे न जाई रे ।
हरि रंग मेरो मन रंग्यो, और न रंग सुहाई रे ।। टेक ।।
अविनाशी रंग ऊपनो, रच मच लागो चोलो रे ।
सो रंग सदा सुहावनो, ऐसो रंग अमोलो रे ।। 1 ।।
हरि रंग कदे न ऊतरै, दिन दिन होइ सुरंगो रे ।
नित नवो निरवाण है, कदे न ह्वैला भंगो रे ।। 2 ।।
सांचो रंग सहजैं मिल्यो, सुन्दर रंग अपारो रे ।
भाग बिना क्यों पाइये, सब रंग मांहीं सारो रे ।। 3 ।।
अवरण को का वरणिये, सो रंग सहज स्वरूपो रे ।

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